वैदिक घड़ी समय, संस्कृति और विज्ञान का संगम

  विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का संदेश

 

✍ प्रेरणा गौतम :-

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और उसे सपोर्ट करने वाला मोबाइल ऐप का लोकार्पण एक प्रेरक पहल है। यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि हमें स्मरण कराता है कि समय गणना कोई यांत्रिक प्रक्रिया भर नहीं, बल्कि हमारी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। इस घड़ी के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम संभव है और यह समय को एक जीवंत, प्राकृतिक और सांस्कृतिक अनुभव में बदल सकता है।

यह पहल विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, क्योंकि यह उन्हें अपनी विरासत से जोड़ती है, ज्ञान को पुनर्जीवित करती है और समय की नई भावनात्मक समझ विकसित करने की राह दिखाती है।

इसकी कुल लागत करीब एक करोड़ रुपये रही। इसे मुख्यमंत्री निवास के मुख्य द्वार पर स्थापित किया गया, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इसका शुभारंभ हुआ।

मुख्यमंत्री ने इसे राजा विक्रमादित्य की गौरवशाली परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि यह घड़ी उज्जैन की उस समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करती है, जिसने भारत को सदियों तक समय गणना का वैश्विक केंद्र बनाया।

वैदिक घड़ी की विशेषताएँ

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अपनी कई अनोखी खूबियों के कारण सामान्य घड़ियों से अलग है-

1. समय प्रदर्शन प्रणाली

दिन की गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।

एक दिन को 30 मुहूर्तों में बाँटा गया, प्रत्येक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का।

यह 24 घंटे की आधुनिक प्रणाली से एकदम अलग और प्रकृति-केंद्रित है।

2. पंचांग एकीकरण

घड़ी में हिंदू पंचांग की सभी सूचनाएँ शामिल हैं—तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, व्रत और पर्व।

30 शुभ-अशुभ मुहूर्तों का प्रदर्शन इसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों में और भी उपयोगी बनाता है।

3. मोबाइल ऐप की सुविधाएँ

ऐप 189 भाषाओं में उपलब्ध है और 7,000 वर्षों का पंचांग डेटा देता है।

यह जानकारी 3179 ईसा पूर्व (भगवान श्रीकृष्ण जन्मकाल) से उपलब्ध है।

इसमें मौसम अपडेट, धार्मिक अलार्म और महाभारत काल संबंधी रोचक विवरण भी शामिल हैं।

4. प्राकृतिक और खगोलीय जुड़ाव

घड़ी अमावस्या-पूर्णिमा के प्रभाव, चंद्रमा की गति, समुद्री ज्वार-भाटा और मानव शरीर पर असर को भी दर्शाती है।

यह छह ऋतुओं – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर से जुड़कर जीवन और प्रकृति का समन्वय कराती है।

5. विज्ञान और ज्योतिष का संयोजन

घड़ी में न केवल समय, बल्कि पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, मूर्ल, शुभ-अशुभ मुहूर्त, चंद्रमा एवं ग्रहों की स्थिति संकेतित होती है; साथ ही GMT और IST का तुलनात्मक प्रदर्शन भी है.

 

वैदिक घड़ी का कार्यप्रणाली

साधारण घड़ियाँ 24 घंटे और 60 मिनट की स्थिर प्रणाली पर आधारित हैं, जबकि वैदिक घड़ी:

दिन की शुरुआत सूर्योदय से मानती है।

एक दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है।

समय की गणना सूर्य की छाया, ऋतुओं और खगोलीय घटनाओं से करती है।

 

इस प्रणाली में मुहूर्त केवल समय नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन का एक सूत्र है यह हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना

सिखाता है।

 

स्थापना से होने वाले लाभ

1. सांस्कृतिक पुनरुत्थान

वैदिक घड़ी भारत की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है। जैसे योग को 2014 में यूनेस्को द्वारा मान्यता मिली, वैसे ही यह भी वैश्विक पहचान दिला सकती है।

2. प्राकृतिक सामंजस्य

मुहूर्त आधारित समय-प्रबंधन जीवन को संतुलित करता है और मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य को सहारा देता है।

3. शैक्षिक और व्यावहारिक महत्व

मोबाइल ऐप लाखों लोगों को पंचांग और वैदिक समय तक पहुँच उपलब्ध कराता है। यह अनुसंधान, शिक्षा और धार्मिक कार्यों में अत्यंत उपयोगी ।

4. वैश्विक प्रसार

189 भाषाओं में उपलब्धता इसे विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रचार का साधन बनाती है। यह भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाएगी।

 

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल एक समय मापन यंत्र नहीं है, बल्कि यह भारत की आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यह घड़ी हमें सिखाती है कि समय केवल तिथियों का सिलसिला नहीं, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, सोच और विरासत का आईना है।

मध्यप्रदेश से शुरू हुई यह पहल पूरे भारत और विश्व को यह प्रेरणा देती है कि जब परंपरा और आधुनिकता साथ चलते हैं, तभी सच्चा विकास और सामंजस्य संभव होता है

 

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